प्यार क्या है? और कैसे होता है

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What is Love How it Happens
Image Source ="Pexels.com"

प्यार क्या है इस सवाल का जवाब लाखों करोड़ों लोग जानना चाहते है? सच्चे प्यार जैसी कोई चीज़ होती भी है या यह महज सिर्फ आकर्षण होता है यह सवाल कई लोगो को परेशान करता है।

क्या पहली नजर में होने वाला प्रेम प्यार है?

कुछ लोग कहते है जो पहली नजर में किसी से हो जाए वो प्यार है। पर पहली नजर में होने वाला प्यार अक्सर धीरे धीरे कम हो जाता है और फिर ग़ायब हो जाता है। यह प्यार नहीं हो सकता।

जब प्रेम के बदले प्रेम मिलने लगे क्या वो प्यार है?

जब आपको किसी व्यक्ति से प्रेम हो जाए और वह इसे स्वीकार-ले तो इसे प्यार का नाम दे दिया जाता है। लेकिन यदि वह व्यक्ति आपके प्यार को स्वीकारने से इनकार कर दे तो आप उसे सबक सिखाने, बर्बाद करने जैसी योजनाएं बनाने लगते है। जिस व्यक्ति से आप इतना प्रेम करते थे उसका बुरा सोचना प्रेम नहीं हो सकता। क्योंकि जहां प्यार है वहाँ नफरत कैसे हो सकती है भला?

Mr Right और Mrs Right के मिलने पर जो मैजिक होगा क्या वो प्यार है?

कुछ लोग कहते है जब Mr Right और Mrs Right एक दूसरे से मिलते है तो कुछ मैजिकल होता है और वही प्यार है। यदि इसे प्यार कहते है तो वो क्या है जो माँ अपने बच्चे से करती है, एक भाई अपनी बहन से करता है।

तो फिर आखिर प्रेम है क्या

दरअसल प्यार बहुत उलझा हुआ सा है इसीलिए तो कहा जाता है लव इस कॉम्प्लिकेटेड। प्यार को हम शब्दों में बयान नहीं कर सकते है। यह इतना ज्यादा विस्तारित है कि इसकी परिभाषा देना ना मुमकिन है। यह एक खूबसूरत एहसास है जिसे आप सिर्फ महसूस कर सकते है।

जहां जुड़ाव वही प्रेम

प्रेम दो लोगो को आपस में गहराई से जोड़ता है और वो दो लोग सिर्फ प्रेमी- प्रेमिका नहीं कोई भी हो सकते है, जैसे दो दोस्त, माता और पुत्री, पिता और पुत्र, भाई और बहन, इंसान और कोई जानवर आदि। जब भी किसी दो प्राणी में जुड़ाव हो जाए वही प्रेम है।

प्रेम के प्रकार

प्रेम तीन प्रकार का होता है। पहला वो जो आकर्षण से मिलता है। यदि आपको प्यार होने की रफ़्तार बहुत तेजी से बढ़ रही है तो समझ जाइये यह प्यार नहीं आकर्षण है। यह आकर्षण एक नहीं बल्कि कई लोगो से हो सकता है। इस प्रेम में अनिश्चितता और असुरक्षा का भाव होता है और इस तरह का प्रेम जल्दी ख़तम हो जाता है।

दूसरा प्रेम वह जो सुख सुविधा से मिलता है। मतलब जहां आपको सुविधा देने वाला इंसान मिल जाए आप उसके साथ अच्छा महसूस करने लगते है और इसे प्रेम मानने लगते है। इस प्रेम में आपको बहुत आनंद मिलता है पर यह आनंद जीवन पर्यन्त नहीं रहता।

तीसरा प्रेम है दिव्य प्रेम। जिसे यदि आपकी भाषा में बोला जाए तो True Love. यह प्रेम सागर की तरह होता है जिसकी गहराई मापी नहीं जा सकती। यह प्रेम निस्वार्थ होता है। इसमें आप बिना किसी शर्त के सामने वाले के लिए उपस्थित होते है।

प्यार कैसे होता है

जैसा की हमने ऊपर बताया की जब देखते ही प्यार हो जाए वह महज आकर्षण है। तो बात जब प्यार की हो रही है तो अब हम केवल सच्चे प्यार की ही बात करेंगे।

सच्चा प्यार किसी को देखते ही नहीं होता है इसमें जल्दबाजी की कोई जगह नहीं होती है। जब आप किसी व्यक्ति को अच्छे से जानने लगते है, उसे समझने लगते है, उस पर भरोसा करने लगते है, उसकी अच्छी बुरी हर तरह की बाते आपको अच्छी लगने लगती है तब शुरू होता है सच्चे प्यार का अध्याय।

यह प्यार किसी एक से ही होता है जैसे कृष्ण का था राधा के लिए। इसमें आप मन से और दिल की गहराइयो से जुड़े होते है। यह प्यार कभी ख़तम नहीं होता। इसमें आप सामने वाले की क़द्र करते है, उसे रिस्पेक्ट देते है और उसके प्रति अपने कर्तव्य को बिना बोले निभाते है।

क्या आपको भी है किसी से सच्चा प्यार? हमें कमेंट करके बताइये।

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