हर व्यकित को किसी न किसी कारण से गुस्सा आता है। जैसे बच्चो के ठीक से पढाई न करने पर, माता पिता उन पर गुस्सा करते है। एम्प्लॉईज़ के ठीक से काम ना करने पर बॉस उन पर गुस्सा होता है आदि। क्रोध आना या फिर कहे गुस्सा करना एक सामान्य सी बात है।

लेकिन यदि इस पर नियंत्रण न किया जाये तो यह सामान्य सी बात भी बहुत मुश्किल में डाल देती है। क्रोध बहुत विनाशकारी भी हो सकता है। क्रोध के चलते कभी सुख शांति नहीं मिलती। क्रोध सामने वाले व्यक्ति को तो दुःख पहुचाता ही है साथ ही साथ इसे करने वाले को भी अंदर से खोकला कर देता है।

क्रोध अगर बहुत ज्यादा आने लगे तो इसका असर आपके रिश्ते, स्वास्थ्य तथा आपके दिमाग पर भी पढ़ने लगता है। कई बार क्रोध में मनुष्य ऐसा गलत काम कर देता है जिससे उसे जीवन-पर्यन्त पछताना पड़ता है। इसलिए हमें क्रोध पर नियंत्रण करना आना चाहिए।

जिन लोगो को बार बार क्रोध करने की आदत होती है, उनके घर का वातावरण हमेशा मायुस बना होता है।  क्योकि क्रोध अगर आता है तो किसी न किसी पर उतरता जरूर है। इस क्रोध के चलते हम अपनों को और खुद को भी दुखी करते है। यदि आप अपने जीवन में ख़ुशी चाहते है तो क्रोध से दुरी बना लीजिये।

क्रोध पर नियन्त्रण पाने का तरीका (Anger Management Techniques)

पहचाने की क्रोध से होती है सिर्फ हानि

क्रोध पर नियंत्रण पाना कठिन जरूर है किन्तु असंभव नहीं। क्रोध आने की समस्या को दूर करने के लिए हमें पहले हमारे मन के भीतर के क्रोध को पहचानने की जरूरत है। हमें यह बात स्वीकार करनी होगी कि कैसे हमारा क्रोध खुदको और दूसरों को हानि पहुँचाता है। और यदि हम कठिनाइयों में भी शांत रहते है और उसका सामना करते है तो उसका क्या लाभ पहुचता है। इसके बाद हमें अपनी डेली लाइफ में इसे रोकने और बढ़ने से रोकने की कोशिश करना चाहिए।

क्रोध को ऐसे रोके (How to Control Anger)

सबसे पहले तो अपने गुस्से के संकेत को पहचाने

आपका दिल तेजी से धड़क रहा है, आप अधिक तेजी से सांस ले रहे हैं, और बस आप कुछ ना कुछ करने वाले है। इसके अलावा अन्य लक्षण भी दिखाई दे रहे है जैसे आपके कंधे में तनाव, आपके सर में दर्द।

यदि आपका नियंत्रण खोने का इतिहास रहा है, और आपको यह लक्षण दिख रहे है तो आपको इस स्तिथि से बहार निकलने की पूरी कोशिश करना है।

बोलने से पहले सोचे

गुस्से के दौरान हम बहुत बार सामने वाले को ऐसा कुछ कह देते है, जिसके लिए हमें बाद में पछताना पढता है। इसलिए कुछ भी कहने से पहले अपने मन के विचारों को इकट्ठा करने की कोशिश करे। इससे कई बार आप गलत शब्द बोलने से बच जाते है।

जब आप शांत रहे, तभी अपना गुस्सा व्यक्त करे

आपने ऊपर बताये गए पॉइंट्स के हिसाब से आपने सोचने के लिए वक्त ले लिया है, आपके सामने सब स्पष्ट है। अब यदि आप किसी पर गुस्सा उतार रहे है तो मौखिक रूप से निकाले ना की हाथ पाई करके। और हां स्पष्ट रूप से और सीधे सीधे अपनी चिंताओं और जरूरतों को समझाए। दूसरों को चोट पहुँचाने या उन्हें नियंत्रित करने की कोशिश ना करे।

रिलैक्सेशन ट्रिक्स का अभ्यास

किसी ने आपका काम बिगाड़ दिया है, या कुछ नुकसान कर दिया है या किसी भी कारण से आपको अंदर ही आपका क्रोध खा रहा हो तो रिलैक्सेशन ट्रिक्स का सहारा ले। गहरी साँस लेने वाले व्यायाम का अभ्यास करे, आराम वाले दृश्य की कल्पना करे, जो चीज़ आपको शांति दे ऐसे वाक्यांश का इस्तेमाल करे जैसे की “सब ठीक हो जायेगा”, “जिंदगी में छोटी मोटी चीज़े तो चलती है”, “हर चीज़ अपने हिसाब से नहीं होती” आदि।

आप चाहे तो संगीत सुन सकते है, पार्क में टहल कर आ सकते है, इसके अलावा जो भी चीज़ आपको सुकून दे वो कर सकते है।

योग और मेडिटेशन

जिंदगी इतनी आसान भी नहीं है। कई बार ऐसा वक्त भी आता है जब हमारे आसपास तनाव ही तनाव होता है। यह तनाव हमें चिड़चिड़ा बना देता है, और हम छोटी छोटी बातो पर गुस्सा करने लगते है। आपको ज्यादा दूर जाने की जरुरत नहीं है आपने बचपन में खुद की देखा होगा की जब आपके पिता के ऑफिस में किसी तरह की टेंशन चल रही होती है तो वो किस तरह छोटी सी बातो पर भी आपको डांट देते थे।

रोजाना योग और ध्यान का अभ्यास आपको तनाव से निजात दिलाने में मदद करता है। इसलिए कुछ समय आप इसके लिए जरूर निकाले, क्योकि यह आपके शरीर स्वास्थ्य के लिए भी जरुरी है।

गुस्से पर खुद का नियंत्रण नहीं होता यह मिथ भूल जाये

कई बार हमने लोगो को कहते सुना है, की गुस्से में हमने जो किया उसमे हमारी कोई गलती नहीं है। हम अपने क्रोध को नियंत्रित नहीं कर सकते, तो हम आपको बता दे की इस बात में कोई सच्चाई नहीं है।

आपके किस परिस्तिथि में है, या आप कैसा महसूस कर रहे है, इस बात पर तो आपका नियंत्रण नहीं रहता है, लेकिन हां आप अपने गुस्से को कैसे व्यक्त करते है इस बात पर आपका नियंत्रण जरूर है। आप मौखिक रूप से या शारीरिक रूप से बिना अपमानजनक हुए भी अपने गुस्से का इज़हार कर सकते है। यदि कोई गुस्से में आपकी शर्ट भी खीच ले तो आप भी वैसी ही प्रतिक्रिया दे यह जरुरी नहीं है।

समाधान ढूंढने की कोशिश करे

आपको क्या चीज़ गुस्सा दिलाती है, इस बात पर ध्यान देने के बजाय आप उसको हल करने की कोशिश करा करे। अपने आप को हमेशा यही बात याद दिलाते रहे की गुस्से से चीज़े कभी नहीं बनती बल्कि हमेशा बिगड़ती है।

क्रोध प्रबंधन कार्यक्रम

यदि आप खुद से क्रोध पर काबू नहीं कर पा रहे है तो क्रोध प्रबंधन कार्यक्रम का हिस्सा भी बन सकते है। इस तरह के एंगर मैनेजमेंट प्रोग्राम्स में या तो आपकी वन तो वन काउन्सलिंग होती है या तो समूह में काम हो सकता है।

इस तरह के कार्यक्रम एक दिन या एक सप्ताह से मिलकर बनते हैं। कुछ मामलों में यह महीने से अधिक भी हो सकते है। कार्यक्रमों की संरचना इस बात पर निर्भर करती है की उन्हें कौन प्रदान कर रहा है। लेकिन अधिकांश कार्यक्रमों में संज्ञानात्मक व्यवहार थेरेपी (सीबीटी), साथ काउंसलिंग शामिल होती हैं।

हमने क्रोध को रोकने के विषय में काफी चर्चा करली है। क्रोध विनाशकारी है। क्रोध कई घर तोड़ देता है। क्रोध में डूबा इंसान मार मारी भी करता है।

क्रोध इंसान को हैवान बना देता है इसलिए क्रोध से दुरी बनाए और अपने जीवन को सुखमय बनाये

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